आज के समाज में नकारात्मक तत्व को लोग अपने दिल में श्रद्धा और सहानभूति के साथ जगह देते हैं | नैतिकता को इस हिसाब से देखते हैं जैसे “ये बाते हैं बातों का क्या .........”। इसके पीछे आखिर वहज क्या है ?आखिर क्या कारण है कि लोग नकारात्मक तत्वों की ओर आकर्षित होते हैं.........। लोगों की प्रकृति असुर को सुर बनाने की क्यों होती जा रही है । अब लोगों की ऐसी सोच हो रही है की ऐसे तत्वों के बारे में कहते हैं ......तुझमें रब दिखता है.......मैं क्या करूँ ........|
पहले उन लोगों का सिक्का चलता था जो नैतिकता को सर्वोपरी समझते थे और गलत लोगों को हमेशा हेय दृष्टि से देखते थे .......। अब उनका सिक्का चलता है कि उसने कितने गलत कार्य किये हैं और उससे कितना धन अर्जित किया है ..............| जहाँ लोग पहले ऐसे लोगों से सहायता तक लेना पसंद नहीं करते थे ......उनके सम्पर्क को भी असहजता से लेते थे ..........। आज वहीँ यह, सबसे गर्व का विषय होता है की फलाने बाहुबली ने हमें दावत दी है ..........।
आज रावण समाजवादी है और राम साम्राज्य वादी । चूँकि राम को अपनी पत्नी सहर्ष रावण को सौंप देनी चाहिए थी । यह समाजवाद का सबसे बड़ा उदाहरण होता...| क्योकि समाजवाद में अपना कुछ नहीं होता है सब कुछ समाज का होता है ..........| आज गलत को सजा देना नीचता की परिभाषा है............समय का तकाजा है कि गुणी को तो, घुन खाए और अवगुणी के धुन गायें ।
जीवन का अर्थ बदल चुका है। नमक की परिभाषा बदल गई है। क्योंकि वो अब मशीनों में रिफयींड होने लगा है । तो अब देश का नमक नहीं मशीन का नमक खाते हैं, तो संवेदन हीन होना लाज़मी है। क्योंकि मशीन की अपनी कोई संवेदना नहीं होती है ........हाँ बर्बरता मशीन की पहली निशानी है ........|
आप कितने प्रभावित करने वाले हैं । यह इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपको कितने दाव-पेच आते हैं ।कदाचित समय परस्ती के कारण कोई आपकी बुराई कर दे । पर यह आपके लिए अच्छा है कल वही आपके साथ कबाब और शबाब का मजा लेता मिल जाएगा ........। यदि आप बौद्धिक रूप से कुशाग्र हैं पर दाव-पेंच में माहिर नहीं हैं तो आप सा बुद्धिहीन कोई नहीं है। लोग आपको सामने भी बेज्जत कर सकते हैं । पर अगर आप माहिर हैं तो सौ बार सोचना पडेगा कि आप उसके कितने काम आ सकते हैं आप सोने की मुर्गी बन जाते हैं ..........। परोक्ष में भी बुराई करने से कतराते हैं ।
अयूब कसाब, आफजल गुरु बने हैं ।समाजवाद तो कोई इनसे सीखे । अपने देश के लिए जान देने वालों के लिए इतनी संवेदना नहीं पर इनके लिए संवेदनाओं का अम्बार है भले ही कुछ छुपे हों ..........| यह बात भी बेनामी हो रही है जहाँ कहा गया था “लगेंगे हर बरस मेले .वतन पर मिटने वालों का बांकी यही निशां होगा ...” ।अब देश द्रोही के भी जनाजे में ज्यादा भीड़ होती है आपको टीवी पर हर मिनट उसके जागने हगने , सोने छींकने की खबर मिल जायेगी ..पर एक सडक पर तरपते व्यक्ति का क्या हुआ वह जान नहीं पाएंगे .....वैसे यह जरूरी भी नहीं ये सब गैर जरुरी चीजें है ...। २५० लोग की मौत मायने नहीं रखती पर एक फांसी फांस जरूर चुभा जाती है मानवता चीखने लगती है । हितोपदेश में एक बात कही गयी है की यदि एक व्यक्ति के त्याग से परिवार का भला हो तो उस व्यक्ति को त्यागने में कोई बुराई नहीं यदि के परिवार के त्याग से गाँव का भला हो तो उस परिवार को त्यागने में कोई बुराई नहीं .......पर आज यदि एक समाज को त्यागने से व्यक्ति का भला हो तो उस समाज को नष्ट करने में कोई बुराई नहीं है इस सिद्धांत पर चल रहे हैं वही सच्चे आदर्शवादी है आज के ........।
समय यह है कि राजनीति में पार्टी विशेष की बुराई करने पर आप पुरावाग्र्ही ही होते हैं तथाकथित लोग ही पूर्वाग्रह से मुक्त मिलेंगे वो भी वही जो यह गाते हैं कि जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे ......। ऐसा नहीं तो दरवाजा आपको पता है ऑटोमैटिक है बंद होने के बाद खुलेगा भी नहीं ........उसमे कोई कुण्डी भी नहीं लगी जिसे आप तोड़ सकें .......।
आज स्वाभाव ऐसा है कि आपकी कोई बेज्जती नहीं कर सकता जब तक आप न चाहें .........क्योंकि आप एक मार्किट के सेल्स मेन हैं । जिसकी आज तक कोई बेज्जती नहीं कर सका चाहे बीच चौराहे पर उसके कपडे फाड़ दो फिर अगले दिन आपके दरवाजे की घंटी बजेगी ..........श्रीमान जी यह लेलो ..........हमारा तो काम है इसे बेचना कितने दिन आप ऐसा व्यवहार करेंगे कभी तो खरीद ही लोगे .......।यह है जीवन का सही ज्ञान जो सर्वव्यापी है । इसी सिद्धांत पर अनर्गल बात करने वाले चल रहे हैं ...। आज कम्पीटीसन चल रहा है की कौन कितना घोटाले बाज है । उसमे भी घोटाले में कौन घोटाला कर सकता है ।चारा से व्यापम तक और सर्वहारा से आपन तक वाह वाही आपकी ही है। क्या हुआ अगर जेल भी हो गयी ! इससे क्या फर्क पड़ता है ?कौन इतना कमा लेगा .........।बिजली की चकाचौंध में भी लाठी और लालटेन ही काम आयेंगे .........।.साईकिल से किला कैसे बनाया जाता है कोई और करके तो दिखाए .......। बांकी बातें फिर कभी .......।
मनोज कुमार ‘ मैथिल ‘
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