साहित्य नभ द्वारा नववर्ष की पूर्व संध्या
पर २८-१२-२०१४ को “नववर्ष काव्य गोष्ठी” का आयोजन युवा आलोचक
संदीप तोमर की अध्यक्षता में नांगलोई दिल्ली में किया गया | आयोजन की सफलता के लिए
साहित्य नभ परिवार सभी को हार्दिक धन्यवाद देता है | गोष्ठी की शुरुआत कवि अखिलेश द्विवेदी
अकेला की राम वदना से हुई जिसमे दुबारा राम राज्य की कामना की गयी | अखिलेश जी ने अटल
बिहारी वाजपेयी जी के रचना मैं गीत नहीं गात हूँ तथा मैं गीत नया गाता हूँ सुना कर
साहित्य नभ की ओर से जन्मदिन की बधाई दी | मनोज कुमार मैथिल ने ‘पसीने से तरबतर जाड़े में... एवं हाल ही में हुए पेशावर कांड पर निः शब्द हुआ बैठा
हूँ मैं... का पाठ किया जिसने लोगों को काफी प्रभावित किया | हमारे बीच गाज़ियाबाद से
आयीं कवयित्री सोनाली मिश्रा जी की कविता जरा बीडी तो जलाने दो... ने सभी को मन्त्र
मुग्ध कर दिया | अमित कुमार की कविता गहरे समुन्दर का किनारा कौन बनता है आज के दौर
में संबंधो का अच्छा विश्लेषण था | ललित कुमार मिश्र ने देश के लिए नौजवानों का आह्वाहन
किया तथा श्रृंगार रस के रूप में उनका कहने
के लिए भी इजाजत मांगना वाकई काबिले तारीफ था | हमारे बीच मौजूद युवा गज़लकार इरफ़ान
‘राही’ ने अपने नए रूप से हास्य कविता पढ़कर परिचित कराया | इस कार्यक्रम
के अध्यक्ष संदीप तोमर जी ने भी अपनी कविता के ज़रिये किताबों की होती दैनिये स्थिति
का विश्लेषण किया | हमारे मुख्या अतिथि इंदरजीत गहलोत जी ने अपने विचार रखे
एवं साहित्य नभ को इसतरह के आयोजन आगे भी करते रहने को कहा और बताया की देश के विकास
में साहित्य जगत का कितना योगदान है | साहित्य नभ के सचिव अखिलेश द्विवेदी अकेला जी
ने सभी का धन्यवाद किया विशेष रूप से इस काव्यगोष्ठी के संयोजिका सोनाली मिश्रा जी
का |
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