कुछ अजब घुटन सी होती है
जीवन में चुभन सी होती है
सपनों की नाव में छेद बड़ा
हिचकोले रेत पे लेती है
कल कल कल कल
हर हर हर हर
पल पल पल पल
चल चल चल चल
कुछ आवाज सुनाई देती है
पर घने तम के जंगलों में
कब राह दिखाई देती है
बसंत भी पतझड़ दिखता है
पत्थर पे लिखा भी मिटता है
साफ़ आसमां से जब,
ओलों की बारिश होती है
चिलचिलाती धूप में भी
कुछ कपन सी होती है
कुछ अजब घुटन सी होती है
वो दिवाकर दंभ भरे
दुनिया को रोशन जो करे
गहरे सागर में हाँ कब
रौशनी उसकी होती है
कुछ अजब घुटन सी होती है
मनोज कुमार 'मैथिल '
जीवन में चुभन सी होती है
सपनों की नाव में छेद बड़ा
हिचकोले रेत पे लेती है
कल कल कल कल
हर हर हर हर
पल पल पल पल
चल चल चल चल
कुछ आवाज सुनाई देती है
पर घने तम के जंगलों में
कब राह दिखाई देती है
बसंत भी पतझड़ दिखता है
पत्थर पे लिखा भी मिटता है
साफ़ आसमां से जब,
ओलों की बारिश होती है
चिलचिलाती धूप में भी
कुछ कपन सी होती है
कुछ अजब घुटन सी होती है
वो दिवाकर दंभ भरे
दुनिया को रोशन जो करे
गहरे सागर में हाँ कब
रौशनी उसकी होती है
कुछ अजब घुटन सी होती है
मनोज कुमार 'मैथिल '
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