जुल्फों को यूँ ना सवारों
किसी का दिल मचलता है
नजरों को यूँ ना झुकालो
किसी का दम निकलता है
ये लट भी हो गए हैं बेइमा
आ जातें हैं रुखसार पर
रोक लगाने को दीदार पर
यूँ ना पहरे लगा लो
इतना तो हक़ बनता है
जुल्फों को यूँ ना सवारों
किसी का दिल मचलता है
मनोज कुमार 'मैथिल '
किसी का दिल मचलता है
नजरों को यूँ ना झुकालो
किसी का दम निकलता है
ये लट भी हो गए हैं बेइमा
आ जातें हैं रुखसार पर
रोक लगाने को दीदार पर
यूँ ना पहरे लगा लो
इतना तो हक़ बनता है
जुल्फों को यूँ ना सवारों
किसी का दिल मचलता है
मनोज कुमार 'मैथिल '
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