बुधवार, 18 जनवरी 2012

साँझ सवेरे ऐ दिल मेरे

साँझ सवेरे ऐ दिल मेरे
ढूंढ़ रहा हूँ इक पल अपना
खोया यहाँ पर गया कहाँ पर
मिले अगर तो ढूंढ़ के रखना
उस पल में बस मैं ही मिलूँगा
और मिलेगा मेरा सपना
सुबह की खिलती धूप मिलेगी
दुपहर भी अंगराई वाली
शाम जहाँ अठखेलियाँ करती
और कहे न थकने वाली
थके हुए पल कभी न तकना
साँझ सवेरे ऐ दिल मेरे ...

चाँद की शीतलता जहाँ हो
चांदनी ओढ़ निशा शर्माए
प्रणय पर्व के उत्सव में
गुण गुण गुण गुंजन गाए
तान वहां पर बांसुरी छेड़े
नृत्य मनोहर करता झरना
सांझ सवेरे ऐ दिल मेरे ...

मनोज कुमार मैथिल
 





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