रविवार, 3 जनवरी 2016

यह सदी अब किशोर हो गया

यह सदी अब किशोर हो गया
पन्द्रह से सोलह की ओर हो गया
षोडष की मादकता में भीगा
बहक जाने का शोर हो गया
कानों कान जब खबर फैली
मन कैसा चितचोर हो गया
रस्सी पर चलती पूछे बाला
क्या मेरा भी नया भोर हो गया
फूटपाथ पर सोना मत
कुचले जाओगे बारम्बार
कानून तो है ही गांधारी
मानवहीन अमीरों का कार हो गया
अच्छे दिन चुनावी जुमला था
जनलोकपाल पर पाला पड़ गया
झाड़ू लालटेन साथ हो लिए
आप भ्रष्टों का बाप हो गया
यह उम्र हो गयी अपने मन की
सोच हुई है कितनी दुर्बल
नैतिकता का पाठ छोडकर
काम शास्त्र में खो गया
यह सदी अब किशोर हो गया
पन्द्रह से सोलह की ओर हो गया
‪#‎मनोजकुमारमैथिल‬

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