दिल जलता है मेरा
देख बदलते लोग
हिज्र की बात नहीं
बेबात फिसलते लोग
दिल जलता है मेरा
देख बदलते लोग
बसे जो दिल में
बना के आशियाँ.....
अब आंगन में भी,
नहीं ठहरते लोग
दिल जलता है मेरा
देख बदलते लोग
छांव पीपल के तले
दुपहर कटती रही
रात होने पे वहीँ
क्यों डरते लोग
दिल जलता है मेरा
देख बदलते लोग
ना हम कह ना सके
सबके घाव भरते रहे
मांगे जो मरहम हम
तो क्यों ना कहते लोग
दिल जलता है मेरा
देख बदलते लोग
- मनोज कुमार ‘मैथिल’
देख बदलते लोग
हिज्र की बात नहीं
बेबात फिसलते लोग
दिल जलता है मेरा
देख बदलते लोग
बसे जो दिल में
बना के आशियाँ.....
अब आंगन में भी,
नहीं ठहरते लोग
दिल जलता है मेरा
देख बदलते लोग
छांव पीपल के तले
दुपहर कटती रही
रात होने पे वहीँ
क्यों डरते लोग
दिल जलता है मेरा
देख बदलते लोग
ना हम कह ना सके
सबके घाव भरते रहे
मांगे जो मरहम हम
तो क्यों ना कहते लोग
दिल जलता है मेरा
देख बदलते लोग
- मनोज कुमार ‘मैथिल’