मंगलवार, 29 अप्रैल 2014

सोचा है तुमने

ज़िन्दगी कितनी  हसीन है
खट्टी मीठी नमकीन है
सोचा  है तुमने
खुआब देखो रोका है किसने
पर उसे कब पूरा करोगे
सोचा  है तुमने
सैलाब मे बह गया  तिनका-तिनका
बसेगा आशियाना किनका-किनका
सोचा  है तुमने
शब्द कि जादूगरी आती नहीं
राजनैतिक समझदारी भाती नहि
फिर बदलोगे कैसे जमाना
सोचा  है तुमने
बाहुबली तुम नहीं हो
धन के अली तुम नहीं हो
फिर तुम लड़ोगे कैसे
सोचा है तुमने
शब सोये सुबह उठे
उठकर चलना कब सीखोगे
सोच है तुमने
खड़े चौराहे पर
किसी साथी के इंतज़ार मे
हाथ बढ़ाना कब सीखोगे
सोच है तुमने
जिंदगी कितनी हसीन है
खट्टी मीठी नमकीन है
सोचा है तुमने

मनोज कुमार 'मैथिल'